पुलवामा हमला – यह युद्धज्वर किसलिए?

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पुलवामा के नृशंस हमले के 100 घंटे बीतने से पहले आतंकवादी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के शीर्ष नेतृत्व का खात्मा किया गया है। 15 वें कॉर्प के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल के. एस. ढिल्लों ने सोमवार को मीडिया के समक्ष यह जानकारी दी।
लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने कहा कि केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के कारवां पर हुए हमले में पाकिस्तान में छुपे हुए और आईएसआई से समर्थन प्राप्त जैश के नेतृत्व का हाथ था। कामरान नामक आतंकी सरगना इस हमले के पीछे मास्टर माइंड था और उसे समाप्त कर दिया गया है। लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने यह भी चेतावनी दी कि आप या तो हिंसा छोड़ दे अथवा मरने के लिए तैयार हैं।
पुलवामा हमला भारत की अंतरात्मा पर हुआ हमला है। जैश-ए-मोहम्मद ने खुद कबूल किया कि वह इस हमले के पीछे था। यह सारी दुनिया को पता है, कि जैश-ए-मोहम्मद संगठन पाकिस्तान में काम करता है। इस संगठन का नेता मसूद अजहर पाकिस्तान के दामाद की तरह रहता है। पाकिस्तान सरकार के खर्चे पर वह अस्पताल में उपचार (?) लेता है और वहाँ से हमले का आदेश देता है। इससे यही साबित होता है कि हमले के पीछे पाकिस्तान का सीधा हाथ है।
इस परिस्थिति में केंद्र सरकार पर पाकिस्तान के खिलाफ कार्रवाई करने का दबाव न आता तो ही आश्चर्य था। यह आम जन भावना है, कि पाकिस्तान की नकेल कसनी ही होगी। इसके बारे में कोई दो राय नहीं है। लेकिन इसको लेकर शोरशराबा करने में कोई तुक नहीं है। ऐसा लगता है कि देश में समाचार चैनलों ने यह विवेक छोड़ दिया है। इसीलिए उन्होंने युद्ध करो, युद्ध करो का आग्रह सरकार से जारी रखा है। कुछ चैनलों ने तो सरकार को ऐसे सलाह देना शुरू कर दिया मानो वे खुद सेना प्रमुख हो।
एक ही झटके में हमारे 40 वीर जवानों के प्राण हरण करनेवाले इस हमले का बदला सरकार को लेना ही होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यह कहकर इसके संकेत दिए हैं कि जो आग आपके दिल में लगी है वही मेरे दिल में है। खुद पाकिस्तान भी इससे वाकिफ है। यही वजह है कि इस घटना के पांच दिन बाद पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर अपनी चुप्पी तोड़ी।
लेफ्टिनेंट जनरल ढिल्लों ने जो जानकारी दी वह इस कारवाई का केवल एक पहलू है। लेकिन पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए हमें कुछ युद्ध रणनीति बनानी होती है। युद्ध के मैदान में अपने बलाबल का हमें विचार करना पड़ता है। हम जैसे यह बात भूल ही गए है। चट मंगनी और पट शादी की तरह माजरा चल रहा है। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने कहा है कि पुलवामा ही नहीं, भारत में किसी भी आतंकवादी हमले से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। इतना ही नहीं, अगर भारत हमला करता है, तो हमें मजबूर होकर उसका उत्तर देना पड़ेगा। इसका मतलब है कि पाकिस्तान परमाणु देश होने का फायदा उठाकर अंतरराष्ट्रीय समुदाय को ब्लैकमेल कर रहा है। और चीन जैसा देश उसका साथ दे रहा है।


यह सब भूलाकर चैनल के बहादुर सरकार को कोस रहे है। वे पूछ रहे हैं कि एक सप्ताह खत्म होने के बाद भी वे कार्रवाई क्यों नहीं करते।
इस संबंध में पंजाब के मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह द्वारा निभाई गई भूमिका काफी समझदारी भरी है। गौरतलब है कि 1965 में पाकिस्तान के खिलाफ युद्ध में अमरिंदर सिंह ने खुद हिस्सा लिया था।
उन्होंने कहा, कि पूरा देश भारतीय सैनिकों की हत्या पर संतप्त है और पाकिस्तान के खिलाफ कठोर कार्रवाई की उन्होंने मांग की। लेकिन यह कार्रवाई सैन्य, राजनयिक या आर्थिक इन तीन स्तरों पर अथवा तीनों स्तर पर एक साथ की जानी चाहिए। “केंद्र सरकार को तय करना चाहिए कि कौन सी कार्रवाई की जाए, लेकिन कुछ कदम तुरंत उठाए जाने चाहिए। यह कोई नहीं कहता, कि आपको तुरंत लड़ना चाहिए, लेकिन यह नरसंहार मजाक नहीं है। कुछ करना होगा। मैं ऊब गया हूं, देश ऊब गया है,” उन्होंने कहा।
यह सच है, कि देश ऊब गया है और लगातार होनेवाले आघातों से व्यथित भी है। लेकिन इस तरह युद्धज्वर बनाना इसका हल नहीं है। यदि आप दुश्मन को खत्म करना चाहते हैं, तो आपको इसे शांत चित्त होकर ही करना होगा।
अफज़ल खान ने कई मंदिर तोड़ें, लोगों पर अत्याचार किया और गांव के गांव जलाए ताकि वाजी महाराज बाहर आए और भावनावश होकर लढ़ें। लेकिन महाराज ने अपना आपा नहीं खोया और खान को अपने जाल में खींचकर उसे समाप्त किया। इसलिए वे हिंदवी स्वराज्य तैयार कर सकें।
पाकिस्तान को सबक आज नहीं कल सीखाना होगा। लेकिन उसके लिए शोर-शराबा करते हुए दुश्मन के हाथ मजबूत करने की कोई आवश्यकता नहीं है।

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